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ओडिशा उच्च न्यायालय ने इलेक्ट्रो-होम्योपैथी चिकित्सक को दी बड़ी राहत

ओडिशा हाईकोर्ट का अहम फैसला: इलेक्ट्रो-होम्योपैथी क्लिनिक सील मुक्त करने का आदेश

कटक: इलेक्ट्रो-होम्योपैथी (Electro Homeopathy) की कानूनी स्थिति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में, ओडिशा उच्च न्यायालय ने एक इलेक्ट्रो-होम्योपैथी चिकित्सक को अंतरिम राहत प्रदान की है। कोर्ट ने उनके क्लिनिक को सील मुक्त करने का आदेश दिया है, जिससे वे अगली सुनवाई तक अपना अभ्यास जारी रख सकें।

मामले का विवरण:

यह मामला, जिसे रिट याचिका (सिविल) संख्या 24857/2025 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, हिमालय पटेल द्वारा दायर किया गया था। याचिकाकर्ता ने अपनी प्रैक्टिस को जारी रखने की अनुमति मांगी थी, जिसे अधिकारियों ने रोक दिया था। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता की ओर से दी गई दलीलों को स्वीकार करते हुए, माननीय न्यायमूर्ति दीक्षित कृष्ण श्रीपद की एकल पीठ ने 20 जून, 2025 को यह आदेश पारित किया।

कोर्ट का मुख्य आदेश:

  • अंतरिम आदेश: कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के पक्ष में “प्रथम दृष्टया” (prima facie) मामला बनता है, और इसलिए उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी जानी चाहिए।
  • क्लिनिक सील मुक्त करने का निर्देश: कोर्ट ने विपक्षी पार्टियों (प्रतिवादियों) को तुरंत याचिकाकर्ता के क्लिनिक या क्लिनिकल स्थापना को सील मुक्त करने का निर्देश दिया।
  • अगली सुनवाई तक अभ्यास की अनुमति: आदेश में स्पष्ट किया गया है कि याचिकाकर्ता अगली सुनवाई की तारीख तक अपने क्लिनिक का संचालन और इलेक्ट्रो-होम्योपैथी का अभ्यास जारी रख सकते हैं।
  • सरकार के रुख का संदर्भ: कोर्ट ने भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 14 फरवरी, 2011 को जारी एक पत्र का हवाला दिया। इस पत्र में कहा गया था कि हालांकि इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को एक मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है, लेकिन इसके अभ्यास या इससे संबंधित शिक्षा देने पर कोई रोक नहीं है।

मामले में आगे क्या होगा?

  • कोर्ट ने विपक्षी पार्टियों, जिनमें भारत सरकार भी शामिल है, को नोटिस जारी किया है।
  • याचिकाकर्ता के वकील को निर्देश दिया गया है कि वे सभी संबंधित दस्तावेजों को तीन कार्य दिवसों के भीतर विपक्षी पार्टियों को सौंप दें।
  • केस की अगली सुनवाई की तारीख 15 अक्टूबर, 2025 तय की गई है।
यह फैसला इलेक्ट्रो-होम्योपैथी और अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, क्योंकि यह मौजूदा कानूनी स्थिति को फिर से स्पष्ट करता है और यह सुनिश्चित करता है कि सरकार द्वारा कोई नया नियम बनाए जाने तक उनका अभ्यास जारी रह सके। यह मामला इस तरह की चिकित्सा पद्धतियों की कानूनी स्थिति को लेकर भविष्य में होने वाले घटनाक्रमों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

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